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Sarvepalli_Radhakrishnan_Teachers_Day_Reality


Sarvepalli_Radhakrishnan_Teachers_Day_Reality
सर्पल्ली राधाकृष्णन शिक्षक दिवस की सच्चाई
From Mahendra Yadav
https://www.facebook.com/mahendra.yadav.399

Mahendra Yadav
7 September near New Delhi
राधाकृष्णन ने अपने छात्र की थीसिस चुराकर इंडियन फिलॉसफी किताब छपवाई। इसमें कलकत्ता की मॉडर्न रिव्यू में छात्र जदुनाथ सिन्हा और उनके बीच लंबा पत्र व्यवहार छपा। राधाकृष्णन सिर्फ यह कहते रहे कि यह इत्तफाक है...क्योंकि शोध का विषय एक ही था..राधाकृष्णन पर लिखी तमाम किताबों में इस विवाद का जिक्र है..एक अन्य प्रोफेसर बी एन सील के पास भी थीसिस भेजी गई थी..ब्रजेंद्रनाथ सील....उन्होंने पूरे मामले से अपने को अलग कर लिया था...बहुत मुश्किल से राधाकृष्णन ने मामला सेट किया..जज को भी पटाया...जदुनाथ को समझाया ...तब मामला निपटा..पहले तो ताव में उन्होंने भी मानहानि का केस कर दिया था...पर समझ में आ गया कि अब फजीहत ही होनी है...इसलिए कोर्ट के बाहर सेटलमेंट करने में जुट गए..बड़े बड़े लोगों से पैरवी कराई.मध्यस्थता कराई।
जदुनाथ के साथ तो अन्याय हुआ, पर जब वो खुद पीछे हट गए तो मामला खत्म ..हमारी आपत्ति ऐसे व्यक्ति को भारत रत्न देने और उसके जन्मदिन पर शिक्षक दिवस मनाने पर है।

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C.l. Chumber, Asrar Khan, Satyendra Yadav and 8 others like this.


C.l. Chumber We demand from the govt to withdraw the Bharat Rattan Award of Dr. S. Radha Karishnan a former President of India who was a copy writer theif . It should stop the Teacher Day celebrations on his birthday as he did a fraud as a teacher with his student .


Mahendra Yadav
6 September near New Delhi
थीसिस चोरी करके छपवाई किताब और बन गए महान
इंडियन फिलॉसॉफी के लेखक कहलाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन की ये
किताब मूल रूप से उनके छात्र जदुनाथ सिन्हा की पीएचडी थीसिस थी जो उन्होंने
कलकत्ता यूनिवर्सिटी के तत्कालीन प्रोफेसर डॉ राधाकृष्णन और दो अन्य
प्रोफेसरों के पास सबमिट की थी।

राधाकृष्णन ने थीसिस पास करने में देरी की और उस बीच उसे ऑक्सफोर्ड
यूनिवर्सिटी से छपवा लिया। इसके बाद ही उसे पीएचडी दी गई। जदुनाथ सिन्हा ने
कलकत्ता'ज मॉडर्न रिव्यू मेग्जीन में पत्र लिखकर ये दावा किया कि राधाकृष्णन
ने उसकी थीसिस चुराई है। राधाकृष्णन का दुर्भाग्य रहा कि सिन्हा के थीसिस से
संबंधित कई आर्टिकल पत्रिकाओं में पहले ही छप चुके थे। मामला कोर्ट में
गया..1930 में। जदुनाथ ने कहा कि पूरी थीसिस ऑन द रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी में
पहले से सबमिट की हुई है और राधाकृष्णन को ही नहीं, दो अन्य प्रोफेसरों से भी
चेक होनी थी..इसलिए उनके पास भी है । राधाकृष्णन ने हूबहू कॉपी किया था..करीब
दो हजार पेज की किताब में जल्दबाजी में वो कुछ भी हेरफेर नहीं कर पाए.मामला
एकदम साफ था..फैसला होने से पहले ही गरीब परिवार के छात्र जदुनाथ सिन्हा को दस
हजार रुपए देकर मामला निपटा लिया गया।

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You, Manoj Abhigyan, Arun Obc, C.l. Chumber and 38 others like this.


Chandan Kumar Madhukar ऐसे धुर्त हमारे प्रथम उपराष्टपति है....धुर्तो के नाम पर शिक्षक दिवस....छिँ....!
6 September at 22:45 via mobile · Like · 1


Mahendra Yadav Radhakrishnan: A Religious Biography
By Robert N. Minor
6 September at 22:50 · Like


Mahendra Yadav Radhakrishnan: His Life and Ideas
By K. Satchidananda Murty, Ashok Vohra

में भी इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र है...
6 September at 22:50 · Like · 2


Devendra Yadav Vaise yakin nahi ho raha. Agar pramanik bat h to is din ko AFSOS DIWAS k rup me manane me kya harj h?
6 September at 22:52 via mobile · Like · 2


Devendra Yadav Ummid h apne mujhe pehchan liya hoga.
6 September at 22:56 via mobile · Like


Mahendra Yadav ji?
6 September at 23:48 · Like


Arbind Kumar 10k aaj ke 10 cr ke brabar h
7 September at 01:16 · Like · 1


Mahendra Yadav गूगल पर जदुनाथ सिन्हा और राधाकृष्णन टाइप कीजिए...सारी जानकारी मिल जाएगी। कल विनोद भास्कर जी ने बताया था..कि सुना है राधाकृष्णन ने चोरी की थी..उसके बाद सारी जानकारी नेट से ही जुटती चली गई..
7 September at 01:20 · Like · 1


Mahendra Yadav Radhakrishnan: A Religious Biography
By Robert N. Minor

Radhakrishnan: His Life and Ideas
By K. Satchidananda Murty, Ashok Vohra
7 September at 01:41 · Edited · Like


Sheo Badan Yadav आश्चर्य होता है....???
7 September at 08:30 · Like · 1


Brij Lal Yadav Wase to darsanaki koi kitab padhakar ya nakal kar nhi ban sakta....darsan ak swatantra vichar h jo parkriti aur pranio ke bich ke risto aur Parasparik byawaharo ka rahasya kholta h....Kitab padhkar koi baganik doctor engineer wakil to ban sakta h par darsanik nhi.....
7 September at 08:54 via mobile · Edited · Like


Sandeep Verma सूचना में ब्राम्हणी व्र्चाव ऐसी खबरे हमेशा छुपाता है .
7 September at 13:16 · Like


विबुधेश यादव dhikkar hai .......
7 September at 21:06 · Like · 1


Mahendra Yadav Sheo Badan Yadav ji..आश्चर्य कैसा....
7 September at 22:17 · Like


Sheo Badan Yadav आश्चर्य इस लिए कि अगर आप यह कहना चाहते है की राधाकृष्णन को थीसिस लिखने नहीं आती तो यह बात हजम नही होती....
8 September at 07:11 · Like


Mahendra Yadav थीसिस लिखना तो आती होगी....अनेक लोगों को आती है...पर जिस इंडियन फिलॉसॉफी के लिए वे विख्यात हुए..इतना नाम कमाया..भारत रत्न, राष्ट्रपति पद जैसे हासिल किए....वह मूल रूप से जदुनाथ सिन्हा की थीसिस है.....जिसे चालाकी से उन्होने अपने नाम से छपवा लिया Sheo Badan Yadav ji
8 September at 11:32 · Like


Brij Lal Yadav Mai kahna chata ki hu philoshophy ak asi visay wastu h jisako padhkar koi philoshopher nhi banta...wah to ak davi gun h.....lakho log philoshophy subject se phd karte h aap batao kitne log darsanik bane h?? Krishnan ji ya koi bhi darsanik huwa h to wah unka apna pratibha aur vishes soch thi..
8 September at 11:46 via mobile · Like


Mahendra Yadav दार्शनिक कहां से हो गए राधाकृष्णन.....
8 September at 13:15 · Like


Sheo Badan Yadav भाई साहब.. राधा कृष्णन ने भारतीय दर्शन पर ही नहीं.. और बहुत कुछ लिखा है philosophy पर.......
8 September at 19:16 · Like · 1


Brij Lal Yadav Kuchh logo ko dunia me khamiya hi khamiya dikhti h...chasme ka color sayad asa hoga jo unko har safal adami m kamiya hone ka sak pada karti h..Jo apne mahan bibhutio ki izzat nhi karta usase samman ki ummid karna sahi nhi h..Kuchh logo ko jinna laden aur kasab jyada pasand aate hoge..
8 September at 22:18 via mobile · Like



Mahendra Yadav
6 September near New Delhi
थीसिस चोरी करने का मुकदमा चला था डॉ राधाकृष्णन पर...

He belonged to a very noble family. He was a lord, but he dropped using the word lord before his name “because,” he said, “this looks ugly.” He was participating in a protest against the government just in front of the House of Lords, where they meet. The police were beating the protesters, and they started beating Bertrand Russell. He fell onthe ground – and at that time somebody said, “What are you doing! He is a lord!”

The policeman simply started trembling and said, “Please forgive me – I had no idea that you were a lord.”

He said, “No, you have done perfectly well – I am not a lord. I am protesting against these lords.”

Now, this man could get the Nobel prize for a third-class, third-rate book…. Because of the Nobel prize that book became the most prominent of all his books, which are really valuable.

I told that professor, “You also got deceived by the Nobel prize? And you talk to me about Radhakrishnan? Radhakrishnan later on became president of India and his whole fame depended on a book – two volumes of Indian philosophy. आपको यह जानकारी हैरानी होगी कि ये दोनों भाग चुराए गए थे। राधाकृष्णन के लिखे नहीं थे वे भाग।

मूल रूप से वह एक छात्र की थीसिस थी। राधाकृष्णन उस समय कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। थीसिस उनके पास चेक होने आई थी. उन्होंने थीसिस पास करने में दो साल की देरी कर दी। बड़े प्रोफेसर थे, इसलिए किसी ने उन पर शक नहीं किया।

इन्हीं दो सालों में उन्होंने इंग्लैंड में अपनी किताब इंडियन फिलॉसॉफी प्रकाशित करवाई, जो कि उसे बेचारे छात्र की थीसिस ही थी। उस छात्र की थीसिस से राधाकृष्णन की किताब बिलकुल हूबहू है...एक कॉमा तक का अंतर नहीं है।जब उनकी किताब छप गई तभी उस छात्र को पीएचडी की डिग्री दी गई। यानी राधाकृष्णन की किताब पहले छपी...अब कोई यह नहीं कह सकता था कि उन्होंने चोरी की। अब तो चोरी का आरोप छात्र पर ही लगता।

हालांकि छात्र ने हार नहीं मानी। उसने कलकत्ता हाईकोर्ट में केस कर दिया। छात्र का कहना था, “मैंने दो साल पहले विश्वविद्यालय में थीसिस जमा करा दी थी। विश्वविद्याल में इसका प्रमाण है। अन्य प्रोफेसर भी गवाह हैं क्योंकि वह थीसिस तीन प्रोफेसरों से चेक होनी थी – दो अन्य एक्जामिनर भी गवाह हैं। वह थीसिस मेरी थी और इसलिए यह किताब भी मेरी है। मामला एकदम साफ है...इसे पढ़कर देखिए...."

राधाकृष्णन की किताब में अध्याय पूरे के पूरे वही हैं जो थीसिस में हैं। वे जल्दबाजी में थे, शायद इसलिए थोड़ी बहुत भी हेराफेरी नहीं कर पाए। किताब भी बहुत बड़ी थी- दो भागों में थी। कम से कम दो हजार पेज। इतनी जल्दी वे बदलाव नहीं कर पाए...अन्यथा समय होता तो वे कुछ तो हेराफेरी कर ही देते।

मामला एकदम साफ था लेकिन छात्र ने कोर्ट के निर्णय के पहले ही केस वापस ले लिया क्योंकि उसे पैसा दे दिया गया था। मामला वापस लेने के लिए छात्र को राधाकृष्णन ने उस समय दस हजार रुपए दिए थे। वह बहुत गरीब था और दस हजार रुपए उसके लिए बहुत मायने रखते थे।

http://www.osho.com/library/online-library-nobody-nobel-two-badb5efc-b78.aspx

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Alok Ranjan, Rakesh Yadav, Jitendra Verma and 15 others like this.


Mayur Borkar thief
6 September at 01:07 via mobile · Like


Santosh Yadav somebody said, “What are you doing! He is a lord!”

The policeman simply started trembling and said, “Please forgive me – I had no idea that you were a lord.”...It is he who Radhakrishnan...
6 September at 01:07 · Like · 2


Kumar Radharaman अब तो न किसी की थीसिस की ज़रूरत,न दो साल का इंतज़ार। इंटरनेट प्रतिपल हाज़िर है।
6 September at 07:57 · Like


Upendra Prasad किस कानून या सरकारी निर्णय के तहत 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है? क्या इस कानून या निर्णय को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती?
6 September at 08:11 · Like


संतोष नायक Fesla kya aaya tha ?????
6 September at 09:46 via mobile · Like


Tadiyampi Shakya Game of lords... to fool the poor fellows
6 September at 11:12 via mobile · Like


Alok Maurya Dronacharya ka vanshaj hai...!
6 September at 12:47 via mobile · Like


Mahendra Yadav Upendra Prasad ji and संतोष नायक जी. चुनौती देने की पहल करनी चाहिए...। फैसला यह रहा कि राधाकृष्णन की तरफ से कई बड़े बड़े नाम बीच बचाव कराने में जुट गए...गरीब परिवार को जदुनाथ सिन्हा को दस हजार रुपए देकर मामला कोर्ट के बाहर निपटाया गया..और मामला वापस कराया गया।.
6 September at 22:57 · Like


Anil Kumar महेंद्र जी शायद आपने नोटिश किया होगा, इस बार बहुजनो (ST SC OBC Pasmanda) ने पहले जैसा फेसबुक पर शिक्षक दिवस नहीं मनाया. मैं इसे हम सब की कलेक्टिव जीत मनता हूँ.
7 September at 02:03 · Like · 1


संतोष नायक Jeevan mai aage badna chahte ho to hamesha apani shoch posetiv rakho ......
mera matalab byang nahi jankari chah raha tha ....
baki etane purane muddo pe bahas se kuch matalab nahi ...
sirf jankari rakho or aage kriyetiv karane ki koshis karo dusare ki lakeerita kr apani badi karane ki koshish nahi karni chahiye apani lakeer badi kheechane ka pryash karna chahiye ...
7 September at 19:21 via mobile · Like


Anil on 2013 09 09, on my wall


Anil Kumar भारत एक ऐसा देश है जहा
किसी ने किसी को गुरु कह दिया तो पुरे देश का गुरुदेव हो गया
किसी ने किसी को महात्मा कह दिया तो पुरे देश का बाप हो गया
बैलून खरीदकर दिया अपने बच्चो को लेकिन सबका चाचा हो गया
अपने स्टूडेंट का थीसिस चुराया तो देश का शिक्षक दिवस हो गया
अपने स्टूडेंट का अंगूठा काट लिया तो सर्वश्रेष्ठ गुरु गो गया
खुद गुरु ने चीटिंग करा दी और बचवा सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हो गया
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